*शिक्षा एक शब्द नहीं यही एक राष्ट्र, एक राज्य,एक समाज, एक संस्कृति और एक इंसान की पहचान होती है हमारे गुरुकुल शिक्षा का आधार ही यही था उसे पहले एक इंसान फिर संस्कृति, समाज, और राष्ट्र के रूप में विकसित किया जाता था पर कुचक्र में फांसकर हमने अपनी ही शिक्षा स्वरूप को बदल दिया जो हमें अक्सर हीन भावना और घोर अवसाद मे धकेल देता है और हम अपनी ही समाज और संस्कृति तथा राष्ट्र के प्रति उदासीन हो कर निज स्वार्थ में लग जाते हैं आज की शिक्षा जिसमें सही शिक्षा की बात छोड़कर सिर्फ स्वार्थ की बात होती है शिक्षा में सबका अधिकार है पर हमने इसमें स्वार्थ जोड़कर इसकी आत्मा को ही दूषित कर दिया है*

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इसके सूत्रधार जिसने इसे नष्ट किया दानव मैकाले जिसने भारतीय शिक्षा संस्कृति का विनाश किया और शिक्षा को अधिकार नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष तक सीमित कर दिया है समय आ गया हम उस मानसिक गुलामी से आजाद हो और अपनी भाषा,समाज, संस्कृति और राष्ट्र को सर्वोपरि रखे जय जगदंबा भवानी 🚩🚩 हर हर महादेव 🚩🚩 जय हिंद 🚩🚩🚩 राहुल सिंह परिहार प्रदेश उपाध्यक्ष शिवसेना ubt छत्तीसगढ़